जानिए आखिर प्रथम विश्व युद्ध क्या था ? What was the first world war in Hindi

What was the first world war in Hindi

What was the first world war in Hindi : आज हम बात करेंगे प्रथम विश्व युद्ध (first world war) के बारे में जिसमें हम आपको बताएंगे कि प्रथम विश्व युद्ध (first world war) क्या था? इस युद्ध के दौरान क्या हुआ? इसका नाम यह क्यों पड़ा? यह कब हुआ और किन किन देशों के बीच हुआ? कौन इस युद्ध में विजयी हुआ और हारे हुए देश के साथ क्या हुआ? यह सब हम आपको विस्तार से बताएंगे जो शायद आपको इतने विस्तारपूर्वक बुक में भी न मिले। इसलिए इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें। बीच में से पढ़ेगे तो शायद समझ न आए। इसलिए ध्यानपूर्वक  पूरा पढ़े तो चलिए शुरू करते हैं विस्तारपूर्वक…..


प्रथम विश्व युद्ध (first world war) युद्ध क्या था ?

प्रथम मतलब जो पहली बार हुआ और विश्व मतलब जिसमें पूरा संसार शामिल हुआ फिर वो अमेरिका हो, ब्रिटेन हो, सोवियत संघ हो, इटली हो, ऑस्ट्रिया हंगरी हो, रूस हो, जर्मनी हो, फ्रांस आदि देश शामिल हो। देखा जाए तो पूरा विश्व ही इस युद्ध में शामिल था और इसे ही विश्व युद्ध कहा जाता हैं। 

यह प्रथम विश्व युद्ध इसलिए कहलाया क्योंकि यह युद्ध एक ऐसा युद्ध था। जिसमे समस्त विश्व बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में ही पूरे यूरोप को बारूद के ढेर मानो खड़ा कर दिया गया हो। और बस एक चिंगारी का इंतजार था। पहली बार ऐसा भयानक युद्ध हुआ था। इसलिए यह प्रथम विश्व युद्ध कहलाया ।


प्रथम विश्व युद्ध (first world war) युद्ध के दौरान : 

What was the first world war in Hindi
प्रथम विश्व युद्ध एक ऐसा युद्ध था। जो सन 1914 से 1918 में सबसे पहले लड़ा गया था इसलिए इसे प्रथम विश्व युद्ध (first world war) कहा गया। यह युद्ध दो गुटों में लड़ा गया था। जिसमे से पहला गुट मित्र राष्ट्र था और दूसरा धुरी राष्ट्र था। इस युद्ध में जहाँ काफी नुकसान हुआ तो वही इस युद्ध के दौरान महिलाओं की स्थिति में काफी सुधार आ गया था क्योंकि युद्ध के दौरान सभी पुरूष सेना में भर्ती हो गए थे और कारखानों में काम करने के लिए पुरुषों की कमी के कारण महिलाओं ने कारखानों में कार्य करना शुरू किया क्योंकि युद्ध के दौरान काफी सामग्री की जरूरत पड़ती हैं।

यही कारण था कि युद्ध समाप्त होने के बाद भी महिलाओं को यह हक मिल गया कि वह भी कार्य कर सकती हैं पुरुषों के समान। इस युद्ध के दौरान जहां सभी की आर्थिक स्थिति खराब हो रही थी तो वही अमेरिका ने खुद को एक शक्तिशाली देश बनाया। कहने का मतलब है कि प्रथम विश्व युद्ध (first world war) से पहले अमेरिका जो आज सबसे ज्यादा शक्तिशाली देशों में गिना जाता है। वह पहले एक कर्जदार देश था। 

जब प्रथम विश्व युद्ध (first world war) हुआ तो इसने बहुत लाभ उठाया। इस देश ने सभी देशों को हथियार बना कर बेचे और युद्ध की जरूरतों के सामग्री को बनाया तथा सभी तक पहुचने का कार्य किया। तभी तो अमेरिका इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता था लेकिन जब उसके दो जहाजों को जर्मनी के द्वारा आक्रमण किया जाता है। तब अमेरिका जर्मनी को सबक सिखाने के लिए 1917 में युद्ध में भाग ले लेता है। युद्ध समाप्ति के पश्चात जो अमेरिका एक कर्जदार हुआ करता था। वही युद्ध के बाद सभी को कर्ज दे रहा था। अपने अपने आर्थिक विकास के लिए और ऐसे न जाने कितने घटनाएं घाटी युद्ध के दौरान।

इसी प्रथम विश्व युद्ध (first world war) के कारण हिटलर और मुसोलिनी का भी उदय हुआ था। जिसका कारण द्वितीय विश्वयुद्ध भी होने के संभावनाएं बने।


इसका नाम प्रथम विश्व युद्ध कैसे पड़ा ?

यह एक ऐसा युद्ध था। जो बारूद के ढेर की तरह था। जिसमे एक चिंगारी ही काफी थी। पूरे विश्व को एक दूसरे से लड़ने के लिए। यह युद्ध देख लोगों ने सोचा अब फिर कभी भी ऐसा युद्ध नहीं होगा और इस युद्ध को ग्रेट वॉर या महायुद्ध का नाम दिया।

लेकिन जब कुछ वर्षों बाद द्वितीय विश्व युद्ध हुआ तो पूरा विश्व हैरत में आ गया। अभी पहले युद्ध की भरपाई भी नही हुई थी कि दूसरे युद्ध में जो भी था। वो भी सब गवा दिया। लोगों में एक आतंक सा छा गया था। तभी लोगों ने इस युद्ध को द्वितीय विश्वयुद्ध कहा और इससे पहले वाले को प्रथम विश्व युद्ध (first world war) कहा जाने लगा और इस तरह इसका नाम प्रथम विश्व युद्ध पड़ा।


यह कब हुआ और किन किन के बीच हुआ ?

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प्रथम विश्व युद्ध सन 28 जून, 1914 ई. से 1918 ई. तक चला था। यनि पूरे चार वर्षीय चलने वाला यह युद्ध था। जिसमें सर्वप्रथम युद्ध ऑस्ट्रिया और सर्बिया के बीच शुरू हुआ और फिर धीरे धीरे इसमें सभी देश शामिल होने लगे। 

इस युद्ध में दो गुट थे। पहला मित्र तथा संयुक्त राष्ट्र का था। जिसमे शामिल थे। जिसमे इंग्लैंड, फ्रांस, जापान, सर्बिया, रूस, पुर्तगाल, इटली, संयुक्त राज्य अमेरिका, रोमानिया, यूनान, पनामा, ब्राजील, क्यूबा, साइबेरिया आदि देश शामिल थे। 

तो वहीं दूसरी तरफ थे। धुरी राष्ट्र तथा केंद्रीय शक्तियों का था। जिसमें जर्मनी, ऑस्ट्रिया हंगरी, बुल्गारिया और तुर्की देश शामिल थे।

इस गुट में से इटली, रूस और फ्रांस ने आपस में त्रिगुट संधि की हुई थी और जब इटली मित्र तथा संयुक्त राष्ट्र के गुट को छोड़ धुरी राष्ट्र में शामिल हो जाता हैं तो बाकी के दो उसका साथ देते हैं और वह उस पर आक्रमण नही करते हैं। यह संधि उनकी प्रथम विश्व युद्ध (first world war) तक तो बरकरार रहती हैं। द्वितीय विश्वयुद्ध में मजबूरन इस संधि को तोड़ना पड़ता है। 

इसके बारे में हम आपको बाद द्वितीय विश्वयुद्ध के लेख में बताएंगे कि क्यों तोड़ना पड़ता है। सबसे अंत में अमेरिका ने इस युद्ध मे भाग लिया था। 1917 में युद्ध समाप्त होने के एक वर्ष पूर्व अमेरिका ने इस युद्ध में हिस्सा लिया। वो भी मित्र तथा संयुक्त राष्ट्र की ओर से युद्ध लड़ा था।


प्रथम विश्व युद्ध क्यों हुआ ?

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बीसवीं शताब्दी के शुरुआती दौर में ही जब पूरा यूरोप बारूदी ढेर पर खड़ा था। तब चिंगारी का कार्य पिछले कुछ वर्षों में घटित घटनाओं ने किया, जैसे - त्रिराष्ट्र संधियां, बर्लिन सम्मेलन, सोवियत संघ और जर्मन का विवाद, बल्गेरिया का प्रश्न, साम्राज्यवाद की भावना, राष्ट्रवाद, सामंतवाद आदि यह सब ऐसी घटना थी। जो विश्व को महाविनाश की ओर ले जा रही थी। 

इन सब घटनाओं में से भी कोई ऐसी घटना न थी जो विश्व को युद्ध में धकेल दे लेकिन जब 28 जून, 1914 को आर्क ड्यूक फ्रांसिस फर्डिनेंड की हत्या हुई जो ऑस्ट्रिया के युवराज थे। उनकी हत्या का दोषी ऑस्ट्रिया ने सर्बिया को ठहराया और ऑस्ट्रिया ने सर्बिया को अल्टीमेटम दिया। अल्टीमेटम में ऑस्ट्रिया ने कुछ शर्तें रखी थी जिसे सर्बिया ने स्वीकार कर लिया किन्तु दो शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। जिसमे से एक यह थी कि ऑस्टिया के अधिकारी सर्बिया में जा कर जांचपड़ताल करें लेकिन यह बात सर्बिया को स्वीकार नहीं थी। 

उनका कहना था कि इससे उनकी प्रभुसत्ता और सम्मान को ठेस पहुँचेगा। इस संबंध में सर्बिया ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय से कहा कि आप जो निर्माण लेंगे हम इसे स्वीकार करेंगे। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय सर्बिया के इस फैसले से सहमत था और उन्होंने कहा कि इन दो शर्तों को आपसी बातचीत से सुलझा लिया जाए। किन्तु इस बात को ऑस्ट्रिया ने अपना अपमान समझा और सर्बिया पर आक्रमण कर दिया। वही दूसरी तरफ सर्बिया भी मानो तैयार ही बैठा था युद्ध के लिए और फिर दोनों में युद्ध शुरू हो गया। इस घटना के बाद यह युद्ध पूरे 4 वर्षों तक चला। जिसमे धीरे धीरे बाकी के देश शामिल होते चले गए। 


कौन इस युद्ध में विजयी हुआ और हारे हुए देश के साथ क्या हुआ ?

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इस प्रथम विश्व युद्ध (first world war) के विजेता मित्र राष्ट्र बने। धुरी राष्ट्र को हार का सामना करना पड़। यह हार धुरी राष्ट्रों के लिए एक ऐसी हार थी। जो वो कभी भी भूले नहीं भूल सकते थे क्योंकि इस हार के बाद उनकी स्थिति इतनी बेकार हो गई थी कि एक तरफ अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए ऋण लिया फिर जीते हुए देशों का जो नुकसान हुआ उसकी भरपाई भी इन्ही को करनी पड़ी थी। 

इस युद्ध से बहुत विनाश हुआ था जैसे - संस्कृति को क्षति, युद्ध ऋण, व्यापार को क्षति, मुद्रा प्रसार, मजदूर आंदोलन आदि ऐसे न जाने कितने है लेकिन इन सब बातों में एक बता ही अच्छी थी। वो थी, महिलाओं की दशा में परिवर्तन देखने को मिला। 


आशा करती हूं कि आपको यह लेख पसंद आएगा और आपको आपके प्रश्नों के उत्तर भी मिलेंगे। आपको यह लेख कैसा लगा यह हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं। 

मैं ज्योति कुमारी, Hindipado.com पर हिंदी ब्लॉग/ लेख लिखती हूँ। मैं दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हूँ और मुझे लिखना बहुत पसंद है।

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(ज्योति कुमारी )

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