बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध - Essay on Beti Bachao, Beti Padhao | Hindi Pado

Essay on Beti Padhao, Beti Bachao | Hindi Pado

प्रस्तावना : जैसा कि हम सब जानते है, महिलाओ के साथ समाज ने हमेशा ही भेदभाव किया है। वर्षों से चली आ रही पुरुषवादी मानसिकता आज भी जीवित है। महिलाओं को उनके अधिकारों से हमारे समाज ने हमेशा वंचित रखा है। बहुत से महापुरषों ने महिलाओं के हक़ के लिए लड़ाई लड़ी। सावित्रीबाई फुले ने लड़कियों की शिक्षा पर ज़ोर दिया। और लड़कियों के लिए भारत में प्रथम स्कूल खोला और भारत की पहली महिला अध्यापिका बनी। डॉ बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर ने भारतीय सविधान में महिलाओं को वो सारे हक़ दिए जिनकी वो हक़दार है। लेकिन आज भी स्त्री को जो इज्ज़त और सम्मान मिलना चाहिए, वो नहीं मिलता. 

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बदलते समय के साथ साथ महिलाओं के प्रति कुछ लोगों की सोच भी बदल रही है और वो लड़के और लड़कियों में फर्क नहीं कर रहे है। लेकिन कुछ लोग जो रूढ़िवादी सोच के है वो आज भी स्त्री को खुद से नीचा ही समझते है,  बल्कि जब कोई महिला गर्भवती होती है तो उनका अल्ट्रासाउंड करके लिंग जाँच करते है और यदि लड़की होती है तो उसे गर्भ में ही मरवा दिया जाता है। इन सब घृणित कार्य को रोकने के लिए हमारे देश में कई तरह के कानून लागू हुए है जैसे- लाडली योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान आदि।


बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का उद्देश्य : 

इस अभियान का उद्देश्य समाज में फैली लिंग भेदभाव को कम करना और असन्तुलन को समान अनुपात में लाना. इस अभियान से कन्या भ्रूण हत्या को भी कम करना है, और हमारी घर की बहू बेटियों को घरेलू हिंसा से बचाने की दिशा में एक सटीक कदम उठाया गया है. इस अभियान का मूल उद्देश्य लड़कियों को शिक्षित करना है, ताकि वह अपने अधिकारों के लिए लड़ने में खुद सक्षम हो सके और समाज में खुद के सामान अधिकार को ले सकें।


बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का महत्व : 

हमारे भारत देश में 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान' का बहुत ही ज्यादा महत्व है क्योंकि आज जहाँ हमारा देश हर क्षेत्र में उभर रहा है जैसे- तकनीकी,  कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य आदि में, तो वही बेटियों के मामले में पीछे रहा गया है. आज यह सब देखकर अच्छा लगता है कि देश में कुछ लोगों को बेटियों की कम होती आबदी पे ध्यान दिया है, और तरह तरह के योजनाए बनाए जा रहे है जैसे - नारी सशक्तिकरण, लाड़ली योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान। तो वही यह जानकर हैरानी भी होती है की भारत जो अपनी एकता और अखंडता के लिए जाना जाता है वह पे आज बेटियों को बचाने के लिए अभियानों की जरूरत पड़ रही है.

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आज जहाँ बेटे आपने ही माँ बाप को घर से निकल देते है, उन्हें वृद्ध आश्रम छोड़ देते है तो वही बेटियों पूरे परिवार को साथ में लेकर चलती है. यह तक कि वेदों में भी लिखा है जहाँ एक स्त्री के साथ अत्यचार होता है उसका सम्मान नही किया जाता, वहाँ पर देवता निवास नही करते और जहाँ सम्मान होता है वहाँ भगवान निवास करते हैं. किन्तु आज लोग उसी कन्या को माता के गर्भ में ही मार डालते है. 

यदि उससे गालती से जन्म ले लिया भी तो उसे चैन से जीने नही दिया जाता है. उसकी मौत से भी बरत जिंदगी हो जाती है बेटियों को घर में ही रखते है कहि जाने नही दिया जाता उन्हें अपनी मर्जी से कोई कार्य करने की आजादी भी नहीं होती तो वही लड़को को हर तरह की आजदी दी जाती है और बिना किसी रोक टोक के. और यदि गलती से घर की बेटियों ने यह पूछा की भाई भी तो जाता हैं इतने देर के लिए फिर में क्यों नही? 

तो माता पिता कहते है वो लड़का है उसका चलता है और तुम लडकी जात हो तुम्हारा नही चलता. काश की  ये लोग समझ पाते कि जहाँ भगवान ने बेटी बेटा में अंतर नहीं किया उन्होंने भी माना कि लड़का लड़की सब एक सामना है वह यह क्यों नहीं मानते की एक स्त्री ही है जिनकी वजह से इनका आस्तित्व है वरन ये कुछ नहीं है केवल धूल है धरती पर पड़ा हुआ. 

अगर आप दूसरे देश में देखें तो वह महिलाओं की स्थिति काफी बेहतर है और यह आए दिन भूर्ण हत्या और रेप जैसे केस सुनने को मिलते है, इसलिए विदेशी यात्री यह आने से डरते हैं. हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शायद यह बात देखी होगी तभी तो आज वह देशों में से आईडिया लेकर यह पर लागू कर रहे है. जिसमें से एक बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान है. 

हम सभी को पता है कि आज यह देश पुरूष प्रधान देश है . जहां महिलाओं को शिक्षा भी नही प्राप्त करने दिया जाता. शयद इसलिए कि यदि वो शिक्षित होने के बाद अपने अधिकारों को जान जायेगी फिर उनके दवाव में नही रहेगी और उनका फिर वर्चस्व स्थापित नही हो पायेगा . यह भी एक ऐसी मानसिकता है जिस कारण महिलाएं पीछे रह गई है.  

आज पुरूष प्रधान समाज को यह जानने और समझने की जरुरत है कि उनके इन सब कृतियों से पूरे भारत देश पर कैसा प्रभाव पड़ रहा है . हमारे प्रधानमंत्री ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान सबसे पहले हरियाणा के पानीपत में 22 जनवरी 2015 गुरुवार को लागू किया था क्योंकि वह लड़कियों की संख्या इतनी कम थी कि यदि यह नही होता तो हरियाणा में लड़कियों का नमो निशान भी ना मिलता.फिर लड़कियों की दशा को सुधारने के लिए पूरे भारत में से 100 जिलों में सबसे पहले बड़ी ही कठोरता से यह कानून लागू हुआ . जिसमे से कुछ जिलो के नाम यह है - अंबाला, कुरुक्षेत्र, रोहतक, यमुना नगर , सोनीपत और पानीपत इत्यादि।


बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की आवश्यकता : 

आज हमारे देश में इन अभियानो की बहुत आवश्कता है, क्योंकि आज किसी भी क्षेत्र में लड़कों की तुलना में लड़कियां अधिक सक्षम होती है और उनसे ज्यादा आज्ञाकारी , धैर्यवान, कम हिंसक,  बुद्धिमान और अभिमानी होती है. यह लडकिया आपने माँ बाप के कार्य को और उनको अच्छे से संभल सकती है . इतना ही नहीं एक स्त्री ही होती है जो माँ, पत्नी, बेटी ,बहु आदि की जिम्मेवारी को अच्छे से निभा पाती है.

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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की जागरूकता :

 जितना जरूरी यह अभियान है हमारे लिए यह भी जरूरी है कि लोग जल्द से जल्द इन अभियान से जागरूक हो और लाखों बेटियों को बचाया जा सकें . इस योजना का मुख्य काम है कन्या भ्रूण हत्या को रोकना और उन्हें शिक्षित करना. तभी तो 22 जानवरी 2015 को यह नियम लागू किया गया हमारे मणिनीय प्रधानमंत्री मंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा. इस कानून का प्रचार प्रसार भी बहुत तेजी से हुआ और यह महिला कल्याण के लिये काफी कारगर साबित हुआ है।


उपसंहार : अंतत लोगों को यह माना चाहिए कि बेटी और बेटा दोनों सामना है. लड़कियों को भी समाज में वह सारे अधिकार मिलने चाहिए जो लड़को को मिलते है, ताकि उनकी स्थिति में सुधार हो. माँ पिता को आपनी बेटियों को हर कार्य करने के लिए आजदी देनी होगी ताकि वह विभिन्न विभागों में स्थान पा सकें और खुद की पहचान बना सके ।

- ज्योति कुमारी 

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